थाम हाथ, चल साथ मेरे, कदम बढ़ा, चल साथ मेरे |
इस जीवन की आपा-धापी में, थम कर दो पल हम जी लेंग,
इस व्यक्तिवादी दुनिया में, मिल कर हम सपने देखेंगे,
जीवन के एकाकी सफ़र में, हमसफ़र हम बन लेंगे |
खुले अम्बर की ऊँचाई में, आज़ाद पक्षियों से उड़ लेंगे,
उस धुंधले क्षितिज की दूरी, हम साथ चल कर नापेंगे,
अथाह सागर की गहराई में, साथ मिल कर झांकेंगे |
मौसम-से बदलते जीवन के, सुख- दुःख आपस में बाटेंगे,
उस खिलखिलाती धूप में, खिलखिला संग हस लेंगे,
दुखों का सावन बरसे तो, दो आंसू हम संग रो लेंगे |
थाम हाथ, चल साथ मेरे, कदम बढ़ा, चल साथ मेरे |
Nyc Poem bro :)
ReplyDelete@aniruddh: Thanks :-)
ReplyDeletewhy would somebody find it funny ?
ReplyDeleteanyways!! meko accchii agi :]
itne time baad inni saari hindi padhi.... :P
btw i didnt know you're so good with hindi words !
@Suman: Why someone found it funny is completely their opinion. And thanks :-)
ReplyDeleteI love writing both in Hindi and in English.
fantabulous poem :D :D
ReplyDelete@samidha: Thank you very much :-)
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