Thursday, January 27, 2011

काश तुम जान पाते इस मोहब्बत को

ना जाने क्यों हमारी जिंदगी एक काश के दायरे में उलझी होती है,
क्या फायदा ऐसी ज़िन्दगी का जो हमें काश की शर्तो पे जीनी होती है |

काश तुम जान सकते इस मोहब्बत को,
काश तुम देख सकते इन् बहते आंसुओ को,
काश तुम महसूस कर सकते इस प्यार की तड़प,
तोह इतना गम ना होता और यह अधुरा अधुरा सा मौसम नम ना होता |

काश तुम पढ़ सकते मेरे हाथों की लकीरों को,
काश तुम सोच पाते मेरे खवाबों की तस्वीरो को,
काश तुम सुन सकते मेरे दिल के अफ्सानो को,
तोह इतना गम ना होता और यह अधुरा अधुरा सा मौसम नम ना होता |

काश तुम समझ सकते मेरे लफ़्ज़ों की गहराई को,
काश तुम जान पाते मेरे होंठो की सचाई को,
काश तुम देख पाते महफ़िल में मेरी तनहइयो को,
तोह इतना गम ना होता और यह अधुरा अधुरा सा मौसम नम ना होता |

काश तुम जोड़ सकते इस टूटे हुए दिल को,
काश तुम समेट इस बिखरते हुए रिश्ते को,
काश तुम निभा पाते इस प्यार के वादे,
तोह इतना गम ना होता और यह अधुरा अधुरा सा मौसम नम ना होता |

यह सोच कर खामोश हो जाता हूँ की अगर यह सब होता तोह यह 'काश' सिर्फ एक 'काश' न होता,
और इस देवाने दिल को भी बेवजह किसी से प्यार होता,
और इतना गम ना होता और यह अधुरा अधुरा सा मौसम नम ना होता |

काश तुम जान पाते इस मोहब्बत को.... काश |

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