Thursday, January 13, 2011

कुछ पंक्तियाँ उस जगह के नाम जहाँ मैंने जाना की जिंदगी क्या है : पिलखुवा

वो स्टेट बैंक रोड की शाम,
वो गाँधी बाज़ार का जाम,
वो मंडी की गलियों का क्रिकेट,
वो यारो के घर छोटे मैगी के पैकेट,
वो स्टेशन के रोड की हवा,
वो पप्पू की टिक्की का तवा,
वो मुच्हड़ की लस्सी,

वो शलेश फार्म की मस्ती,
वो रोहतास की चाट,
वो सलीम-जावेद की फ्राय,
वो तोमर के समोसे,
वो मद्रासी के डोसे,
वो कुलदीप का पान,
वो गोपी स्वीट्स की शान,
वो मोंडे मार्केट का क्राउड,
वो डी.अ.व् का प्राइड,
वो चिपिवाड़े की कुडिया,
वो रेलवे रोड की फुलझड़ियाँ,

वो गंज की सड़के,

जहान कितने थे दिल धडके,

वो यंगस्टर्स की लम्बी बातें,
ऐसी ही है कुछ हमारे पिलखुवा की यादें |

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