एक नज़र तेरी थी जो मेरे पास से गुज़र गई,
एक नज़र मेरी थी जो तुझ पर ही थम गई,
थम जाती ज़िन्दगी ऐसे ही तेरे साथ तोह क्या बात थी|
एक ख्वाब तेरा था कि तेरा कोई अपना हो,
एक ख्वाब मेरा था कि इन आँखों में तेरा सपना हो,
बस जाता तेरे सपनो में तो क्या बात थी|
एक बात तेरी थी कि इश्क पर तुझे भरोसा नही,
एक बात मेरी थी कि मोहब्बत करने से कभी होती नही,
ये हो जाती तुझे मुझसे तो क्या बात थी|
एक जिद तेरी थी की तू प्यार बस उससे करेगी जो तेरा हो,
एक जिद मेरी थी की प्यार सिर्फ तुझसे करूँगा चाहे कुछ भी हो,
मै ही तेरा हो जाता तो क्या बात थी|
एक याद तेरी है जो दिल से कभी जा नही सकती,
एक याद मेरी है जो कभी वापस आ नही सकती,
ये यादें कभी याद न आती तो क्या बात थी|
एक एहसास तेरा है जिस पर हक़ सिर्फ मेरा है,
एक एहसास मेरा है जिसमे तेरी रूह का बसेरा है,
इस एहसास में भी विश्वास होता तो क्या बात थी|
एक हरकत तेरी थी कि प्यार करके भी इज़हार ना किया,
एक हरकत मेरी थी कि उस इज़हार का इंतज़ार ना किया,
ये इंतज़ार ही प्यार बन जाता तो क्या बात थी|
एक गलती तेरी थी कि मै तुझे ना समझा ये तू मुझे बता ना सका,
एक गलती मेरी थी जो तुझे समझकर भी मै जता ना सका,
बिछड़ने का दर्द ये दिल समझ जाता तो क्या बात थी|
एक उल्जहन तेरी है कि तुझे क्या चाहिए ये तेरा दिल जान नही सकता,
एक उल्जहन मेरी है कि मै चाह कर भी सपनो को सच मान नही सकता,
हकीकत बन जाती ये दास्तान तो क्या बात थी|
"के मै उसका हूँ वोह इस एहसास से इनकार करता हैं,
भरी महफ़िल मै भी रुसवा मुझे हर बार करता हैं,
यकीन हैं सारी दुनिया को खफा हैं हमसे वोह लेकिन,
मुझे मालूम हैं फिर भी वोह बस मुझसे प्यार करता हैं|" (डॉ.कुमार विश्वास)
एक नज़र मेरी थी जो तुझ पर ही थम गई,
थम जाती ज़िन्दगी ऐसे ही तेरे साथ तोह क्या बात थी|
एक ख्वाब तेरा था कि तेरा कोई अपना हो,
एक ख्वाब मेरा था कि इन आँखों में तेरा सपना हो,
बस जाता तेरे सपनो में तो क्या बात थी|
एक बात तेरी थी कि इश्क पर तुझे भरोसा नही,
एक बात मेरी थी कि मोहब्बत करने से कभी होती नही,
ये हो जाती तुझे मुझसे तो क्या बात थी|
एक जिद तेरी थी की तू प्यार बस उससे करेगी जो तेरा हो,
एक जिद मेरी थी की प्यार सिर्फ तुझसे करूँगा चाहे कुछ भी हो,
मै ही तेरा हो जाता तो क्या बात थी|
एक याद तेरी है जो दिल से कभी जा नही सकती,
एक याद मेरी है जो कभी वापस आ नही सकती,
ये यादें कभी याद न आती तो क्या बात थी|
एक एहसास तेरा है जिस पर हक़ सिर्फ मेरा है,
एक एहसास मेरा है जिसमे तेरी रूह का बसेरा है,
इस एहसास में भी विश्वास होता तो क्या बात थी|
एक हरकत तेरी थी कि प्यार करके भी इज़हार ना किया,
एक हरकत मेरी थी कि उस इज़हार का इंतज़ार ना किया,
ये इंतज़ार ही प्यार बन जाता तो क्या बात थी|
एक गलती तेरी थी कि मै तुझे ना समझा ये तू मुझे बता ना सका,
एक गलती मेरी थी जो तुझे समझकर भी मै जता ना सका,
बिछड़ने का दर्द ये दिल समझ जाता तो क्या बात थी|
एक उल्जहन तेरी है कि तुझे क्या चाहिए ये तेरा दिल जान नही सकता,
एक उल्जहन मेरी है कि मै चाह कर भी सपनो को सच मान नही सकता,
हकीकत बन जाती ये दास्तान तो क्या बात थी|
"के मै उसका हूँ वोह इस एहसास से इनकार करता हैं,
भरी महफ़िल मै भी रुसवा मुझे हर बार करता हैं,
यकीन हैं सारी दुनिया को खफा हैं हमसे वोह लेकिन,
मुझे मालूम हैं फिर भी वोह बस मुझसे प्यार करता हैं|" (डॉ.कुमार विश्वास)
Love it. Hands down your best poem yet!
ReplyDeleteThanx Mayank :)
ReplyDeletekya baat .. kya baat.. kya baat... thi !!
ReplyDelete:D
love itt :)
specially woh line..
ek yaad teri thi ek yaad meri thi ye yaadein yaad na aati toh kya baat thi ...!
waaahh
Thanx Suman :)
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeletei Like it !!
ReplyDeleteohh ...I loved it :)
mai thodi senti ho gyi thi ..
I really appreciate ur hard work !
:D :D
Thanx :)
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