एक पल में लगता है खुल के जीयु,
फिर खुद में ही छुप जाने को दिल करता है|
कहना चाहता हूँ सबसे ये हाल-ऐ-दिल अपना,
फिर सारे दर्द छुपाने को दिल करता है|
मन चाहता नही रोना कभी मायूस होकर मेरा,
फिर युही आंसू बहाने को दिल करता है|
रहना चाहता हूँ सब कुछ भुला कर खुश,
फिर इन् भीगी सी यादों में डूबने को दिल करता है|
कोशिश करता हूँ की दूर रहू उसके साए से भी मै,
फिर उसी की बाँहों में सिमट जाने को दिल करता है|
हर पल चाहता हूँ की बस अब युही रहे ज़िन्दगी मेरी,
फिर खुद ही इसे बदलने को दिल करता है|
कुछ कह गये कुछ खामोश रह गये इस मोहब्बत में,
ना जाने कितनो का मन हर पल डरता है,
एक 'ना' के कारन टूट जाते है लाखो दिल,
उस ना को मै हाँ में बदल दूँ दिल करता है|
love it :)
ReplyDeleteLove it! One of your best poems :-)
ReplyDeleteThank u :)
ReplyDeletedamn good.....very well written :)
ReplyDeleteThank u :)
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