Tuesday, October 4, 2011

तुम

इस वक्त के हर काश में हो तुम,
मेरे दिल के हर एहसास में हो तुम।
दूर होकर भी मेरे पास हो तुम,
इस जिस्म की हर साँस में हो तुम।

न आज में न मेरे कल में हो तुम,
पर फिर भी लगता है पल-पल में हो तुम।
इन वीरान रातों की तन्हाई हो तुम,
महसूस करता हूँ इस कदर की मेरी परछाई हो तुम।

इन आँखों से बहती भीगी याद हो तुम,
हर दर पर जो मांगी वोह फरियाद हो तुम।
इन दबी हुई साँसों की आहात हो तुम,
बरसों से न मिलि जो, इस दर्द को वोह राहत हओ तुम।

न लिखी खुदा ने जो, मेरी वोह तकदीर हो तुम,
इन हाथों से मिट चुकी है जो, वोह लकीर हो तुम।
हर लम्हे में करता हूँ जो, वोह इबादत हो तुम,
जी रहा हूँ जिसे बेवजह, उस ज़िन्दगी की आखरी चाहत हो तुम।

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