यह अनजाना सा दरद अब थम नही पता,
बीता हुआ है जो दौर वो गुज़र क्यों नही जाता|
क्या ढूँढती है यह निगाहें जब कोई कमी नही है इस ज़िन्दगी में,
कुछ तो बात है जो मै वक़्त पर कहीं पहुँच नही पता|
बीता हुआ है जो दौर वो गुज़र क्यों नही जाता|
चेहरे तो और भी बहुत है वो अकेला नही इस जहाँ में,
है इतना दूर वो मुझसे तो दिल के पास क्यूं नही आता|
बीता हुआ है जो दौर वो गुज़र क्यों नही जाता|
तनहइयो की बाहों में यह दिल ना जाने क्यूं सिमट है जाता,
जब पूछता हूँ ऐसा क्यूं तो आँखों में आंसू है भर लाता|
बीता हुआ है जो दौर वो गुज़र क्यों नही जाता|
यह अनजाना सा दरद अब थम नही पता,
बीता हुआ है जो दौर वो गुज़र क्यों नही जाता|
No comments:
Post a Comment