Saturday, August 28, 2010

बीते लम्हे

जब पहली बार मिला था तुझसे तो कुछ ऐसा लगा था,
की जैसे कोई अपना प्यार से इस दिल में दस्तक दे गया |

हम तरसते थे सच्ची मोहब्बत को कभी ऐसा भी वक़्त था,
फिर आपसे हुई मुलाकात और ऐसा लगा की शायद ये सपना भी पूरा हो गया |

मन में चाहत उठी इस मुलाकात को प्यार में बदलने की जो अपने पूरी की,
आज दिल को यकीन हुआ की कोई तोह है जो मेरे ना मिलने पर बेक़रार हो गया |

मोहब्बत तो ना जाने कितने करते है हमसे पर इन आँखों की नमी कोई हटा नही पाया,
एक आपका ही प्यार ऐसा था इस ज़िन्दगी में जो बारिश की बूंदों में इन आंसुओ को पहचान गया |

खुद से ज्यादा भरोसा करने लगे थे आप पर की आप ना कभी हमसे दूर जाओगे,
पर वक़्त बदलते देर नही लगती और जिससे की टूट कर मोहब्बत वोह भी मुझसे दूर हो गया |

लोग कहते है की प्यार हो या दोस्ती मरता कोई नही किसी की जुदाई में,
शायद लोग सही थे पर तेरे जाने से एहसास हुआ की जिस्म कैसे जियेगा जब दिल धड़कना ही भूल गया |

हम तोह आज भी आपको भूल नही पाए पर शायद आपको मुझे याद करने में तकलीफ होती है,
नए दौर की बहार में तुम भूल गये की तुम बिन ये प्यार का आँगन वीरान हो गया |

जमाना गुजर गया उस सूरत को देखे बिना जिसके प्यार की ज़रूरत दिल को आज भी महसूस होती है,
कभी समझेगी अहमियत तू भी हमारी की क्या बीती थी इस नादान दिल पर जब भरी महफ़िल में ये तनहा हो गया |

No comments:

Post a Comment